Sun, 24 Jul 2022

ग्रामीणों ने मेघ के देवता इन्द्र को प्रसन्न करने मेढक-मेढकी की रचाई शादी

 ग्रामीणों ने मेघ के देवता इन्द्र को प्रसन्न करने मेढक-मेढकी की रचाई शादी

 छत्तीसगढ़ के ज्यादातर हिस्सों में बारिश इन दिनों कहर बरपा रही है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से कइयों के घर डूब गए, कइयों की जान चली गई, लोग लापता हो गए हैं।

कुछ गांवों में तो बाढ़ का पानी तक घुस गया। लोगों को गांव छोड़कर पहाड़ों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं दूसरी ओर सरगुजा क्षेत्र में बारिश न होने से किसान ही नहीं आम ग्रामीण भी काफी परेशान हैं। बारिश काराने को लेकर कई तरह के परंपराओं को निभा रहे हैं, पूजा-पाठ कर रहे हैं, एक ऐसी ही पुरानी परंपरा भैयाथान क्षेत्र में 'बेंग बिहाव' की रही है। इस पूजा पद्धति में मेघ के देवता इन्द्र को मनाने मेढक-मेढकी का विवाह कराकर भगवान महादेव-पार्वती सहित देवी- देवताओं की पूजा- अर्चना कर बारिश की कामना की जाती है।

मेढक की बारात लेकर पहुंचे ग्रामीण, किया गया स्वागत

भैयाथान विकासखंड के अंतर्गत ग्राम गोविंदगढ़ के ग्रामीणों ने शनिवार को मेघ के देवता इन्द्र को मनाने मेढक-मेढकी का विवाह बढ़े धूमधाम से कराया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सच में किसी की शादी हो रही हो। ग्रामीण मेढक की बारात लेकर दर्रीपारा आए, जहां गोविंदगढ़ से आए बारातियों का स्वागत दर्रीपारा के ग्रामीणों ने किया। ग्रामीणों ने धूमधाम से मेढक-मेढकी का विवाह रचाया, ताकि बारिश हो और खेती-बाड़ी हो सके। अकाल की स्थिति निर्मित न हो। मेघ देवता को प्रसन्न करने ग्राम दर्रीपारा में मंडप सजाकर मेढक-मेढकी का विवाह रचाया गया। विवाह के पूर्व गांव की महिलाओं ने हल्दी तेल लगाया और सिंदूर लगाकर विवाह की रस्मों को निभाया गया।

बारिश की कमी से इलाके में पड़ा सूखा

वहीं दोनों गांव के लोगों ने बताया की इस वर्ष बारिश की कमी के कारण क्षेत्र में सूखे की स्थिति निर्मित हो गई है। जुलाई माह बीतने को है, इसके बावजूद क्षेत्र में मूसलाधार बारिश नहीं हुई है। छिटपुट कहीं-कहीं वर्षा हो रही है, जिससे खरीफ की खेती पिछड़ रही है। लम्बे इंतजार के बाद अब बारिश नहीं होने की स्थिति में हमारे पूर्वजों के बताए गए उपायों में से एक 'बेंग बिहाव' परंपरा को हम निभा रहे हैं। इस रस्म में महादेव-पार्वती सहित मेघ देवता से अच्छी बारिश हो ऐसी कामना करते हैं। 

रस्म पूरी कर मेढक-मेढकी को तालाब में छोड़ा

ग्रामीणों ने इस परंपरा को निभाते हुए मेंढक-मेढ़की की शादी के बाद भी गीत-नृत्य बारात विदा होमे तक करते रहे। इस दौरान नाश्ता और प्रसाद का भी वितरण किया गया। दोनों ग्राम के बैगा समाज ने मेढक-मेढकी का विवाह कराया। विवाह उपरांत ग्रामीणों ने मेढ़की की विदाई की। बाराती मेढक-मेढकी को ग्राम गोविंदगढ़ ले गए वहां वर-वधु के घर पहुंचने की रस्म पूरी कर मेढक-मेढकी को तालाब में छोड़ दिया गया। 'बेंग बिहाव' में शामिल महिला-पुरुष मांदर की थाप पर नृत्य व गीत गाते हुए महादेव पार्वती से कहते हैं कि..

हाय रे बरिसे पानी हमर देशे, महादेव पार्वती बरिसे पानी हमर देशे,

हमर देशे बजुरा अकाल, पानी बिना नागर टंगाए, बरिसो पानी हमर देशे।

अब ग्रामीणों को बारिश की उम्मीद

इसके साथ ही गाने की धुन पर गांव की महिलाएं, पुरुष पारंपरिक नृत्य करती रहीं।

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