Tue, 2 Aug 2022

पतंजलि विश्वविद्यालय की एलोपैथी पद्धति का जल्दी होने वाला है इंटरनेशनल कान्फ्रेंस के उद्घाटन पर रामदेव का दावा

पतंजलि विश्वविद्यालय की एलोपैथी पद्धति का जल्दी होने वाला है इंटरनेशनल कान्फ्रेंस के उद्घाटन पर रामदेव का दावा

देश की परंपरागत दवाइयों की हो रही मॉडर्नाइजेशन का लोगों की सेहत पर पडऩे वाले प्रभाव और दवा उद्योगों की प्रमाणिकता पर पतंजलि योगपीठ हरिद्वार की ओर से चार दिन की इंटरनेशनल कान्फ्रेंस में मंथन किया जा रहा है। पतंजलि यूनिवर्सिटी हरिद्वार के सभागार में सोमवार से इस विषय पर इस चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस का आगाज हो गया। कान्फ्रेंस का उद्घाटन योगगुरु पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के स्वामी बाबा रामदेव और बालकृष्ण आचार्य की ओर से दीप प्रज्वलित कर कर किया गया। इस मौके पर बाबा रामदेव ने कहा कि विश्व की एलोपैथिक पद्धति का जल्दी ही ‘शीर्षासन’ होने वाला है। उन्होंने कहा कि एक षड्यंत्र के तहत एलोपैथिक पद्धति की ओर से लोगों की सेहत से जो खिलवाड़ किया जा रहा है उसको पछाडक़र आयुष्मान और योग पद्धति पीछे धकेल देगी। उन्होंने बताया कि इसी विषय को लेकर यहां आयोजित की जा रही इस कान्फ्रेंस में विज्ञानी और ज्ञानी मंथन करेंगे। पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन एवं पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार के संयुक्त तत्वावधन में सोसायटी फॉर कन्जर्वेशन एंड रिसोर्स डिवेलपमेंट ऑफ मेडिशिनल प्लांट, नई दिल्ली तथा नाबार्ड, देहरादून के सहयोग से ‘पारंपरिक भारतीय चिकित्सा का आधुनिकीकरण: लोक स्वास्थ्य एवं औद्यौगिक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ ख्यातिलब्ध विद्वानों, वैज्ञानिकों की उपस्थिति में हुआ।

विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति एवं वैदिक विद्वान प्रो. महावीर अग्रवाल द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर सोसायटी फॉर कंजर्वेशन एंड रिसोर्स डिवेलपमेंट ऑफ मेडिशिनल प्लांट के अध्यक्ष डा. एके भटनागर एवं सचिव जीबी राव द्वारा स्वामी रामदेव को ‘महर्षि सुश्रुत’ सम्मान एवं आचार्य बालकृष्ण को ‘महर्षि वाग्भट्ट सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मेलन में शोध्सार एवं मेडिशनल प्लांट जर्नल के विशेषांक का विमोचन भी हुआ, जो आचार्य बालकृष्ण द्वारा आयुर्वेद अनुसंधन में विश्व को दिए गए उनके योगदान हेतु समर्पित रहा। आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं पीआरआई की वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. वेदप्रिया आर्या ने बताया कि इस सम्मेलन में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यम से लगभग 21 देशों के हजारों प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया। इस सम्मेलन में डा. साध्वी देवप्रिया, डा. केएनएस यादव, डा. वीके कटियार, स्वामी परमार्थदेव, डा. अनुराग वाष्र्णेय एवं डा. अनुपम श्रीवास्तव सहित संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों व विद्वान उपस्थित रहे।

पहले दिन इन्होंने रखे अपने विचार

प्रथम दिवस के सम्मेलन अध्यक्ष एवं नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कृषि के क्षेत्रा में सुधर व विकास के लिए नवीन तकनीकी पर चर्चा की एवं पतंजलि के योगदान की सराहना की। इस अवसर पर डा. एके भटनागर, डा. वेदप्रिया आर्या, नाबार्ड के प्रो. भास्कर पंत, कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा, प्रो. केआर धीमान, प्रो. ओपी अग्रवाल, डा. आरके श्रीवास्तव, डा. पीके जोशी एवं डा. अजीत सिंह नैन ने भी अपने महत्त्वपूर्ण व शोधपरक अनुभव प्रतिभागियों से साझा किए।

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