Fri, 11 Nov 2022

Karnataka: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नादप्रभु केंपेगौड़ा की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का किया अनावरण, जानें कौन हैं 'नादप्रभु केंपेगौड़ा'

Karnataka: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नादप्रभु केंपेगौड़ा की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का किया अनावरण, जानें कौन हैं 'नादप्रभु केंपेगौड़ा'

पीएम नरेंद्र मोदी ने आज नादप्रभु केम्पेगौड़ा की 108 फीट की प्रतिमा का अनावरण किया। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अनुसार, किसी शहर के संस्थापक की यह पहली और सबसे ऊंची कांस्य प्रतिमा है।

इसे समृद्धि की मूर्ति कहा जाता है और बंगलूरू के विकास की दिशा में शहर के संस्थापक केम्पेगौड़ा के योगदान को याद रखने के लिए बनाया गया है। आइए जानते हैं आखिर कौन थे नादप्रभु केंपेगौड़ा? कैसे डाली बेंगलुरु शहर की नींव?

जानें कौन थे नादप्रभु केंपेगौड़ा?
नादप्रभु हिरिया केंपेगौड़ा, जिसे केंपेगौड़ा के नाम से भी जाना जाता है, को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का संस्थापक माना जाता है। केंपेगौड़ा विजयनगर साम्राज्य के अधीन एक सरदार थे और उन्हें 1537 में इस क्षेत्र को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है, जो आधुनिक बेंगलुरु बन गया। केंपेगौड़ा अपने समय के सबसे सुशिक्षित और सफल शासकों में से एक थे। मोरसु गौड़ा वंश के वंशजों के उत्तराधिकारी होने के नाते येलहंकानाडु प्रभु के रूप में शुरू हुआ।

बेंगलुरु के संस्थापक के साथ-साथ समाज सुधारक भी थे नादप्रभु केंपेगौड़ा
1537 में केंपेगौड़ा ने बेंगलुरु शहर को आधुनिक बनाने की कोशिश की और कई झीलों एवं अन्य जल निकायों के निर्माण भी करवाया। केंपेगौड़ा धर्मशास्त्र, साहित्य, व्याकरण, दर्शन और हथियारों के इस्तेमाल के विशेषज्ञ थे। वह एक समाज सुधारक भी थे। केंपेगौड़ा ने मोरासु वोक्कालिगास के एक अनिवार्य रिवाज "बंदी देवारू" के दौरान अविवाहित महिलाओं के बाएं हाथ की अंतिम दो उंगलियों को काटने की प्रथा को प्रतिबंधित किया था। 56 वर्षों तक शहर पर शासन करने वाले केम्पेगौड़ा की मृत्यु 1569 में हुई, लेकिन उनकी विरासत और बेंगलुरु पर प्रभाव बना रहा। आज भी, बेंगलुरु के कुछ सबसे प्रसिद्ध स्थलों का नाम उनके नाम पर रखा गया है, जिनमें केंपेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और केंपेगौड़ा बस स्टेशन शामिल हैं, जिसे पहले मैजेस्टिक कहा जाता था।


 

कांग्रेस ने नादप्रभु केंपेगौड़ा की मूर्ति पर उठाए सवाल
नादप्रभु केंपेगौड़ा की प्रतिमा का अनावरण होने से पहले ही कांग्रेस पार्टी ने इसपर सवाल उठाने शुरु कर दिए। कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि केंपेगौड़ा की मूर्ति बनाने के लिए सरकारी पैसों का इस्तेमाल आखिर क्यों किया गया? केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बनाने का जिम्मा बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के पास है। ऐसे में बीआइएएल को ही केम्पेगोड़ा की प्रतिमा का खर्च वहन करना चाहिए था।

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