Fri, 3 Jun 2022

जानिए क्यों गणपति को बेहद प्रिय है दूर्वा, दूर्वा चढ़ाने के क्या हैं उपाय

जानिए क्यों गणपति को बेहद प्रिय है दूर्वा, दूर्वा चढ़ाने के क्या हैं उपाय

3 जून को शुक्रवार के दिन विनायक चतुर्थी (Vinayaka Chaturthi) मनाई जाएगी. इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है. माना जाता है हर महीने में पड़ने वाली दोनों चतुर्थी के व्रत बेहद शुभ होते हैं. जो भी भक्त गणपति के इस व्रत को रखता है, उसके जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं और हर मनोकामना पूरी होती है. ऐसे परिवार में शुभता बनी रहती है. गणेश भगवान की पूजा के समय उन्हें दूर्वा जरूर चढ़ाई जाती है. मान्यता है कि गण​पति को दूर्वा अत्यंत पसंद है और इसे चढ़ाने से वे शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं. अगर आप भी गणपति को समर्पित विनायक चतुर्थी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो जानिए भगवान को दूर्वा क्यों पसंद है और इसे चढ़ाने के नियम क्या हैं !

इसलिए गणपति को प्रिय है दूर्वा गणपति को दूर्वा चढ़ाने को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है. कथा के अनुसार प्राचीनकाल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था. उसके आतंक से ऋषि, मुनि और देवतागण भी काफी परेशान थे. वो दैत्य मनुष्यों और ऋषि मुनियों को जिंदा ही निगल जाता था. उस राक्षस के आतंक से बचाने की गुहार लेकर देवता और ऋषिगण महादेव के समक्ष पहुंचे. तब महादेव ने कहा कि इस मामले में आपकी समस्या का हल सिर्फ श्री गणेश ही कर सकते हैं. वे ही अनलासुर का नाश कर सकते हैं. इसके बाद सभी ने गणपति से मदद की गुहार लगाई. इसके बाद गणपति ने अनलासुर को जिंदा निगल लिया. लेकिन अनलासुर को निगलने के बाद उनके पेट में जलन होने लगी. काफी प्रयासों के बाद भी वो जलन शांत ही नहीं हो रही थी.

तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें बनाकर श्री गणेश को दीं और इसे खाने को कहा. गणपति ने जैसे ही दूर्वा को खाया, कुछ समय बाद उनके पेट की जलन शांत हो गई. तब से गणपति को दूर्वा बेहद प्रिय हो गई और उन्हें दूर्वा चढ़ाने का चलन शुरू हो गया. दूर्वा चढ़ाने के हैं ये नियम – दूर्वा किसी मंदिर, बगीचे या साफ स्थान पर उगी हुई होनी चाहिए. – दूर्वा के हमेशा जोड़े बनाकर गणपति को चढ़ाना चाहिए. – कम से कम 11 जोड़े चढ़ाना शुभ माना जाता है. – किसी ऐसे स्थान से दूर्वा न तोड़ें, जहां गंदा पानी एकत्रित होता हो. – दूर्वा चढ़ाने के बाद उसे साफ पानी से धो लेना चाहिए. – दूर्वा चढ़ाते समय गणपति के ​नाम या मंत्रों का स्मरण करना चाहिए.

 

Advertisement

Advertisement