Sat, 19 Nov 2022

G-20 शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका की अमेरिका ने की तारीफ़, क्या उभरते ग्लोबल लीडर बन रहे हैं, पीएम मोदी

G-20 शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका की अमेरिका ने की तारीफ़, क्या उभरते ग्लोबल लीडर बन रहे हैं, पीएम मोदी

इंडोनेशिया में हुए G-20 शिखर सम्मेलन के बाद नेताओं के घोषणापत्र यानी 'बाली-डिक्लेरेशन' से जुड़ी बातचीत में भारत ने अहम भूमिका निभाई है. अमेरिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान की तारीफ़ की है जिसमें उन्होंने कहा था- 'आज का युग युद्ध का नहीं है.'

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरेन ज्यां पियरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "भारत ने जी20 शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र संबंधी बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. प्रधानमंत्री मोदी ने साफ़ कहा कि कि आज का युग युद्ध का नहीं होना चाहिए."

उन्होंने कहा, "हमारे पास कई प्राथमिकताओं के बीच एक लचीली वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए वर्तमान खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा चुनौतियों को दूर करने के लिए कोशिश करनी है."

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन बृहस्पतिवार को इंडोनेशिया के बाली में जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेकर लौटे हैं.

भारत अगले साल जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजक होगा. इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो ने 17वें जी-20 का समापन पीएम मोदी के हाथ में आने वाले सम्मेलन की कमान सौंपते हुए किया.

भारत बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है

अमेरिकी मीडिया ने अपने एक संपादकीय में भारत को एशिया में नई उभरती हुई ताक़त बताया है.

अमेरिकी मीडिया ने लिखा है कि जी-20 सम्मेलन में सभी देशों ने मिलकर एक साझा बयान जारी किया जिसमें रूस की ओर से यूक्रेन पर किए गए हमले की निंदा की गई. इसमें एक चीर-परिचित वाक्य को दोहराया गया - "आज का दौर युद्ध का नहीं है." ये वही वाक्य है जो इस साल सितंबर में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई मुलाकात में कहा था.

जैसा कि भारत ने रूस और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को चतुराई से संतुलित किया है, विश्लेषकों का कहना है कि मोदी एक ऐसे नेता के रूप में उभर रहे हैं, जिनका सभी पक्ष सम्मान कर रहे हैं, इसने भारत को एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ के रूप में मज़बूत किया है.

अमेरिकी मीडिया ने अपने लेख में जानकारों के हवाले से लिखा है कि भारत का जी-20 के लिए एजेंडा 'नपा-तुला' था. भारत का एजेंडा था कि वह युद्ध के परिणामस्वरूप ऊर्जा, जलवायु और आर्थिक स्तर पर हुई उथल-पुथल के मुद्दों के इर्द-गिर्द चर्चा करेगा, और भारत की बात पश्चिमी नेताओं ने इस क्षेत्र में एक प्रमुख हितधारक के रूप में सुनी है. क्योंकि भारत एक ऐसा देश है जो पश्चिमी देशों और रूस दोनों के करीब है.

इस विश्लेषण में कहा गया है कि महीनों तक रूस और यूक्रेन युद्ध मामले में सीधे रूस की आलोचना करने से बचने वाले देश भारत और चीन ने इस बार जी-20 के साझा बयान में रूस की आचोलना करने के बीच में आड़े नहीं आए.

क्या ये भारत और चीन की विदेश नीति में किया गया एक बड़ा बदलाव है ताकि वह अपना स्टैंड अमेरिका के साथ मिला सकें. अमेरिका और उसके सहयोगी देश मानते हैं कि यूक्रेन युद्ध में रूस पर दबाव बनाना बिना भारत और चीन के सहयोग के संभव नहीं है.

ये दोनों देश रूस के अहम व्यापार साझेदार हैं.

भारत ने जी20 में कहा कि 'आज का समय युद्ध वाला दौर नहीं है.' वहीं चीन ने हाल ही में कहा है कि 'परमाणु हमले की धमकी देना या परमाणु हमला अनुचित है.'

इस बैठक में रूसी राष्ट्रपति वल्दिमीर पुतिन शामिल नहीं हुए.

G-20 में मोदी ने क्या कहा था

सम्मेलन के पहले दिन अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "कोविड के बाद एक नई विश्व व्यवस्था बनाने की ज़िम्मेदारी हमारे ऊपर है. इस वक़्त की ज़रूरत है कि हम एक साथ मिल कर शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए ठोस संकल्प दिखाएँ."

"मुझे यक़ीन है कि बुद्ध और गांधी की धरती पर पर जी-20 के नेता मिलेंगे, तो हम दुनिया में शांति का एक मज़बूत पैगाम देंगे."

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर पीएम ने कहा, "मैं दोहराता रहा हूँ कि हमें यूक्रेन में युद्धविराम और कूटनीति वापस लाने का तरीक़ा तलाशना होगा. दूसरे विश्वयुद्ध ने दुनिया में तबाही ला दी थी, उस समय नेताओं ने जिस तरह शांति स्थापित करने की गंभीर कोशिशें की थी आज हमें वो करने की ज़रूरत है."

खाद्य आपूर्ति के मामले पर भारत का पक्ष रखते हुए पीएम ने कहा, "भारत में, स्थायी खाद्य सुरक्षा के लिए, हम प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. बाजरा जैसे मोटे, पौष्टिक और पारंपरिक अनाजों को फिर से लोकप्रिय बना रहे हैं. मोटे अनाज वैश्विक कुपोषण और भूख को हालात को भी दूर कर सकता है. हम सभी को अगले साल अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष बड़े उत्साह के साथ मनाना चाहिए."

पीएम मोदी ने कहा- "आज खाद की कमी कल का खाद्य संकट है, जिसका समाधान दुनिया के पास नहीं होगा. हमें खाद और अनाज दोनों की आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर और सुनिश्चित रखने के लिए आपसी समझौता करने चाहिए."

जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तीन घंटे चली मुलाकात की चर्चा हो रही थी. उसी समय पीएम नरेंद्र मोदी कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात कर रहे थे.

मोदी और सुनक के बीच हुई मुलाकात

पीएम मोदी और ब्रितानी पीएम ऋषि सुनक के बीच जी20 में हुई मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि ब्रितानी सरकार भारत के साथ चल रहे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट(एफटीए) बातचीत के सफल होने की दिशा में जितनी जल्दी हो सके काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, पिछले महीने के अंत में अधिकांश बातचीत पूरी हो गई चुकी है.

अप्रैल में दोनों पक्षों ने एफटीए को अंतिम रूप देने के लिए दीवाली की समय सीमा तय की थी लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेदों को देखते हुए सौदे को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका. अब सुनक और पीएम मोदी की मुलाकात के बाद उसके जल्द अंतिम रूप लेने की संभावना है.

हाउस ऑफ़ कॉमन्स में भारतीय मूल के राष्ट्रपति ऋषि सुनक ने कहा कि जी20 में पहली बार भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात में हमने एफ़टीए को लेकर बात की.

उन्होंने ये भी बताया, "मैंने और भारतीय पीएम मोदी के साथ फ्री ट्रेड पर चर्चा की, और हम दोनों ने अपनी टीमों को यह देखने के लिए कहा है कि जितनी जल्दी हो सके हमें इस पर सार्थक निष्कर्ष निकाल कर काम आगे बढ़ाना चाहिए."

सुनक ने ये भी कहा की भारत के साथ हमारी साझेदारी व्यापार के कहीं ज़्यादा है.

इतना ही नहीं पीएम मोदी और सुनक की जी20 में हुई मुलाकात के चंद घंटों बाद ही ब्रिट्रेन ने 3000 भारतीयों के लिए पेशेवर वीज़ा जारी किया. ये वीज़ा तीन हज़ार भारतीयों को दो साल तक ब्रिटेन में काम करने की अनुमति देगा.

ये एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें भारत भी ब्रितानी नागरिकों के लिए पेशेवर वीज़ा जारी करेगा. सुनक ने सदन में ये भी कहा कि वह भारत के साथ सुरक्षा साझेदारी बढ़ाने को लेकर भी बात की थी.

मिज़ोरम में होगा जी20 का आयोजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 2023 में होने वाले 18वें जी20 सम्मेलन की ज़िम्मेदारी ली तो उन्होंने कहा कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में आने वाले सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा.

भारत 1 दिसंबर, 2022 से लेकर 30 नवंबर, 2023 तक जी20 का मेज़बान होगा.

केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा है कि पूर्वोत्तर भारत में आने वाले शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा और कई आयोजनों में से एक आयोजन मिज़ोरम की राज़धानी आइजॉल में होगा.

मीडिया से बात करते हुए रेड्डी ने कहा कि भारत में 200 बैठकें 55 जगहों पर आयोजित की जाएगी. इनमें से एक बैठक आइजॉल में की जाएगी.

मिज़ोरम के पर्यटन राज्य मंत्री रॉबर्ट रोमाविया रॉयटे ने कहा है कि आइजॉल में एक भी पांच सितारा होटल नहीं है, और वह इस दिशा में प्रयास करेंगे.

आने वाले वक्त में राज्य में निजी सेक्टर को निवेश करने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा.

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