Thu, 26 May 2022

अमेरिका को महसूस हो रही भारतीय प्रतिभाओं की जरूरत

अमेरिका को महसूस हो रही भारतीय प्रतिभाओं की जरूरत

डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति रहते हुए अमेरिका में संरक्षणवादी नीतियों को इसलिए अमल में लाया गया था, जिससे स्थानीय अमेरिकी नागरिकों को अवसर मिले।

किंतु चार साल के भीतर ही इन नीतियों ने जता दिया कि विदेशी प्रतिभाओं के बिना अमेरिका का काम चलने वाला नहीं है। इसमें भी अमेरिका को चीन और पाकिस्तान की बजाय भारतीय उच्च शिक्षितों की आवश्यकता अनुभव हो रही है, क्योंकि एक तो भारतीय अपना काम पूरी तल्लीनता और ईमानदारी से करते हैं, दूसरे वे स्थानीय लोगों के साथ घुल-मिल जाते हैं। जबकि चीनी तकनीशियनों की प्राथमिकता में अपने देशों के उत्पाद रहते हैं। पाकिस्तान के संग संकट यह है कि उसके कई युवा इंजीनियर अमेरिका में आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं। इसलिए अमेरिका दोनों ही देशों के लोगों पर कम भरोसा करता है। ऐसे में अमेरिका को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में चीन के उत्पादों को वैश्विक स्तर पर चुनौती देना मुश्किल हो रहा है। अतएव संरक्षणवादी नीतियों के चलते विदेशी पेशेवरों को रोकने की नीति के तहत ग्रीन कार्ड वीजा देने की जिस सुविधा को सीमित कर दिया था, उसके दुष्परिणाम चार साल के भीतर ही दिखने लगे हैं। नतीजतन अमेरिका इस नीति को बदलने जा रहा है. इससे भारतीय युवाओं को अमेरिका में नए अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ जाएगी।

 इसके दुष्परिणाम यह देखने में आए कि अमेरिकी राज्य एरिजोना में इंजीनियरों की कमी के चलते सेमीकंडक्टर निर्माण कंपनी के उत्पादन का लक्ष्य काफी पीछे चल रहा है। नतीजतन इन कंपनियों को आउटसोर्स से काम चलाने को विवश होना पड़ रहा है। इसलिए पचास से अधिक राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने अमेरिकी कांग्रेस को पत्र लिखकर वीजा नीतियों में छूट देने की मांग की है।

अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों के चलते भारतीय नागरिकों के हितों पर कुठाराघात हुआ है। नतीजतन अमेरिका में बेरोजगार भारतवंशियों की संख्या बढ़ गई और जो युवा पेशेवर अमेरिका में नौकरी की तलाश में थे, उनके मंसूबों पर पानी फिर गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एच-1-बी वीजा के नियम कठोर कर दिए थे, जिससे अमेरिकी कंपनियों के लिए एच-1-बी वीजा पर विदेशी नागरिकों को नौकरी पर रखना मुश्किल हो गया। नए प्रावधानों के तहत कंपनियों को अनिवार्य रूप से यह बताना होगा कि उनके यहां पहले से कुल कितने प्रवासी काम कर रहे हैं। एच-1 बी वीजा भारतीय पेशेवरों में काफी लोकप्रिय है। इस वीजा के आधार पर बड़ी संख्या में भारतीय अमेरिका की आईटी कंपनियों में सेवारत हैं। अमेरिकी सुरक्षा विभाग ने भी अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) में एच-1 बी वीजा के तहत आने वाले रोजगारों और विशेष व्यवसायों की परिभाषा को संशोधित कर बदल दिया था। लिहाजा सुरक्षा सेवाओं में भी प्रवासियों को नौकरी मिलनी बंद हो गई। ट्रम्प की 'बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन नीति' के तहत यह पहल की गई थी। इन प्रावधानों का सबसे ज्यादा प्रतिकूल असर भारतीयों पर तो पड़ा ही, किंतु अब लग रहा है कि यह नीति गलत थी।

Advertisement

Advertisement