Wed, 4 Jan 2023

सर्दी के मौसम में निमोनिया रोग है खतरनाक,जाने क्या कहते डॉक्टर

सर्दी के मौसम में निमोनिया रोग है खतरनाक,जाने क्या कहते डॉक्टर

सर्दी के मौसम में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है. एक आंकड़े के अनुसार देश में 2030 तक 17 लाख से अधिक बच्चों की निमोनिया संक्रमण से मौत का खतरा है. स्वास्थ्य एक्सपर्ट का कहना है कि सर्दी के मौसम में निमोनिया का खतरा अधिक होता है. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि निमोनिया दो तरह की बैक्ट्रीरिया स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया एवं हीमोफीलियस इंफ्लूएंजा टाइप टू से होता है. बच्चों के लिए सबसे बड़ी जानलेवा संक्रामक बीमारी है.

बैक्टीरिया से बच्चों को होने वाले जानलेवा निमोनिया को टीकाकरण कर रोका जा सकता है. बच्चों को न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट वैक्सीन यानी पीसीवी के टीके दो माह, चार माह, छह माह, 12 माह और 15 माह पर लगाने होते हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पतालों में आवश्यक टीकाकरण की सुविधा मौजूद है.

विदित हो कि निमोनिया सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी है. बैक्टीरिया, वायरस या फंगल की वजह से फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है. आमतौर पर निमोनिया बुखार या जुकाम होने के बाद होता है. यह 10-12 दिन में ठीक हो जाता है. कई बार यह खतरनाक होता है. खासकर 5 साल से छोटे बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. इसलिए निमोनिया का असर ऐसे लोगों पर जल्द होता है.

निमोनिया होने पर फेफड़ों में सूजन आ जाती है. कई बार पानी भी भर जाता है. ठंड लगने, फेफड़ों पर चोट, प्रदूषण आदि के कारण निमोनिया होता है. यदि किसी को निमोनिया होता है तो उसे दूसरी बीमारियां जैसे खसरा, चिकनपॉक्स, टीबी, एड्स, अस्थमा, डायबिटीज, कैंसर और दिल के रोगियों को निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है .


अनुमंडल अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि निमोनिया को दूर रखने के लिए व्यक्तिगत साफ-सफाई जरूरी है. छींकते-खांसते समय मुंह और नाक को ढंक लें. समय-समय पर बच्चे का हाथ भी जरूर धोना चाहिए. बच्चों को प्रदूषण से बचाएं और सांस संबंधी समस्या न रहे, इसके लिए उन्हें धूल-मिट्टी व धूम्रपान करने वाली जगहों से दूर रखें. बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त पोषण दें. बच्चा छह महीने से कम का है, तो नियमित रूप से स्तनपान कराएं. स्तनपान प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में जरूरी है. भीड़भाड़ वाली जगह से भी बच्चों को दूर रखें. क्योंकि ऐसी जगहों पर संक्रमण फैलने का खतरा अधिक होता है.
तेज बुखार और खांसी है निमोनिया का लक्षण


तेज बुखार होना, खांसी के साथ हरा या भूरा गाढ़ा बलगम आना, सांस लेने में दिक्कत होना, दांत किटकिटाना, दिल की धड़कन बढ़ना, सांस की रफ्तार अधिक होना, उलटी, दस्त,भूख की कमी, होठों का नीला पड़ना, कमजोरी या बेहोशी छाना. चिकित्सकों की माने तो बच्चे को निमोनिया से बचाने के लिए सबसे जरूरी उसका संपूर्ण टीकाकरण है. छोटी उम्र के सभी बच्चों को समय पर टीके लगवाना जरूरी है. न्यूमोकोकल टीका (पीसीवी) निमोनिया, सेप्टिसीमिया, मैनिंगजाइटिस या दीमागी बुखार आदि से बचाव करता है. इसके अलावा, डिप्थीरिया, काली खांसी व एचआईवी के इंजेक्शन भी निमोनिया से बचाव करते हैं.

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