Sat, 14 Jan 2023

Chirayta: कड़वा है ये चिरायता, जाने फायदे और नुकसान

Chirayta: कड़वा है ये चिरायता, जाने फायदे और नुकसान

चिरायता एक आयुर्वेदिक औषधि है,यह कड़वा जरूर होता है, लेकिन शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद भी होता है।  अक्सर लोग कहा करते हैं कि खुजली हो तो चिरायते का सेवन करोखून से संबंधित विकार को ठीक करने के लिए चिरायते का उपयोग करो।

 

उन्होंने बताया कि आयुर्वेद संहिता ग्रंथों के आधार परचिरायता बुखारकुष्ठ रोगडायबिटीज (chirata for diabetes), रक्त विकारसांसों से संबंधित बीमारीखांसीअधिक प्यास लगने की समस्या को ठीक करता है। यह शरीर में होने वाली जलनपाचनतंत्र के विकार, आंखों के रोग, पेट के कीड़े की समस्यानींद ना आने की परेशानीकंठ रोगसूजनव दर्द में काम आता है। इसके अतिरिक्त चिरायता घाव (wound), प्रदर (ल्यूकोरिया)रक्तपित्त (नाक-कान आदि से खून बहने की समस्या)खुजली और बवासीर आदि रोगों में भी प्रयोग में लाया जाता है। इसके पौधे कैंसर में भी फायदेमंद होते हैं,लेकिन गर्भवती महिला और कमजोर पाचन शक्ति के लोग विशेषज्ञ से पूछ कर ही इसका सेवन करें । बिना विशेषज्ञ की सलाह पर इसका सेवन करने से बचना चाहिए।

 

चिरायते की होती हैं कई प्रजातियां

 

चिरायता (chirata in hindi) स्वाद में तीखाठंडाकफ विकार को ठीक करने वाला है। असली चिरायता अपनी जाति के अन्य चिरायतों की तुलना में बहुत ही कड़वा होता है। चिरायते की कई प्रजातियां होती हैंजिनका प्रयोग चिकित्सा में किया जाता है।

 

यह 60-125 सेमी ऊँचासीधाएक साल तक जीवित रहने वाला होता है। इसके पौधे में अनेक शाखाएं होती हैं। इसके तने नारंगीश्यामले या जामुनी रंग के होते हैं। इसके पत्ते सीधे, 5-10 सेमी लम्बे, 1.8 सेमी चौड़े होते हैं। नीचे के पत्ते बड़े तथा ऊपर के पत्ते (chirota leaf) कुछ छोटे व नोंकदार होते हैं।

 

इसके फूल अनेक होते हैं और ये अत्यधिक छोटेहरे-पीले रंग के होते हैं। इसके फल मिमी व्यास केअण्डाकारनुकीले होते हैं। चिरायता के बीज संख्या में अनेकचिकनेबहुकोणीय, 0.5 मिमी व्यास के होते हैं। चिरायते के पौधे में फूल और फल आने का समय अगस्त से नवम्बर तक होता है।

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